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गुनाहों का देवता pdf download


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  DESCRIPTION OF BOOK

Particulars
(विवरण)
Details (Size, Writer, Lang. Pages
(आकारलेखकभाषा,पृष्ठ की जानकारी)
पुस्तक का नाम (Name of Book) गुनाहों का देवता (Gunahon Ka Devta  Pdf)
पुस्तक का लेखक (Name of Author) धर्मवीर भारती (Dharamvir Bharati)
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी (Hindi) 
पुस्तक का आकार (Size of Book)2.45MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)328
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)
novel


ABOUT BOOOK

 यह हिंदी उपन्यासकार धर्मवीर भारती के शुरुआती दौर के और सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में से एक है। इसमें प्रेम के अव्यक्त और अलौकिक रूप का अन्यतम चित्रण है। सजिल्द और अजिल्द को मिलाकर इस उपन्यास के एक सौ से ज्यादा संस्करण छप चुके हैं।



कहानी का नायक चंदर सुधा से प्रेम तो करता है, लेकिन सुधा के पापा के उस पर किए गए अहसान और व्यक्तित्व पर हावी उसके आदर्श कुछ ऐसा ताना-बाना बुनते हैं कि वह चाहते हुए भी कभी अपने मन की बात सुधा से नहीं कह पाता। सुधा की नजरों में वह देवता बने रहना चाहता है और होता भी यही है। सुधा से उसका नाता वैसा ही है, जैसा एक देवता और भक्त का होता है। प्रेम को लेकर चंदर का द्वंद्व उपन्यास के ज्यादातर हिस्से में बना रहता है। नतीजा यह होता है कि सुधा की शादी कहीं और हो जाती है और अंत में उसे दुनिया छोड़कर जाना पड़ता है।

कहानी की एक और पात्र है पम्मी, जिसके मुंह से लेखक ने जिंदगी, प्रेम, वासना, विवाह आदि से जुड़ी तमाम ऐसी बातें कहलवाई हैं, जिन पर पाठक सोचने को मजबूर हो जाता है। एक प्रसंग में पम्मी चंदर से कहती है - कितना अच्छा हो, अगर आदमी हमेशा संबंधों में एक दूरी रखे। सेक्स न आने दे। ये सितारे हैं, देखो कितने नजदीक हैं। करोड़ों बरस से साथ हैं, लेकिन कभी भी एक-दूसरे को छूते तक नहीं, तभी तो संग निभ जाता है। बस ऐसा हो कि आदमी अपने प्रेमास्पद को अपने निकट लाकर छोड़ दे, उसको बांधे न। कुछ ऐसा हो कि होंठों के पास खींचकर छोड़ दे...' उल्लेखनीय है कि अलौकिक प्रेम पर कुछ ऐसे ही विचार बाद के सालों में अमृता प्रीतम ने भी रखे, जिनका संदेश भी यही है कि कोई तुम्हें चाहे तो दिल से चाहे, पास आए, लेकिन तुम्हें छू न पाए, जो तुम्हारे एकाकी पर आक्रांत न हो और जिसके साथ रहकर भी तुम्हारे स्व को कोई ठेस न लगे।

पम्मी के साथ चंदर के अंतरंग लम्हों का गहराई से चित्रण करते हुए भी लेखक ने पूरी सावधानी बरती है। पूरे प्रसंग में थोड़ा सेक्सुअल टच तो है, पर वल्गैरिटी कहीं नहीं है, उसमें सिहरन तो है, लेकिन यह पाठकों को उत्तेजित नहीं करता। लेखक खुद इस उपन्यास के कितने नजदीक हैं, इसका अंदाजा उनके इस कथन से लगाया जा सकता है - मेरे लिए इस उपन्यास का लिखना वैसा ही रहा है, जैसा पीड़ा के क्षणों में पूरी आस्था से प्रार्थना करना और इस समय भी मुझे ऐसा लग रहा है, जैसे मैं प्रार्थना मन ही मन दोहरा रहा हूं, बस |



 Charitraheen Novel by Sarat Chandra Chattopadhyay Download

 "सुधा घर भर में अल्हड़ पुरवाई की तरह तोड़-फोड़ मचाने वाली सुधा, चंदर की आँख के एक इशारे से सुबह की नसीम की तरह शांत हो जाती थी। कब और क्यूँ उसने चंदर के इशारों का यह मौन अनुशासन स्वीकार कर लिया था, ये उसे खुद भी मालूम नहीं था और ये सब इतने स्वाभाविक ढंग से इतना अपने आप होता गया कि कोई इस प्रक्रिया से वाकिफ नहीं था.......... दोनों का एक दूसरे के प्रति अधिकार इतना स्वाभाविक था जैसे शरद की पवित्रता या सुबह की रोशनी.... "



BOOK REVIEW


 इस पुस्तक की कुछ उल्लेखनिए पंक्तियाँ।


छह बरस से साठ बरस तक की कौन-सी ऐसी स्त्री है, जो अपने रूप की प्रशंसा पर बेहोश न हो जाए।
बहलावे के लिए मुस्कानें ही जरूरी नहीं होती हैं, शायद आंसुओं से मन जल्दी बहल जाता है।
अविश्वास आदमी की प्रवृत्ति को जितना बिगाड़ता है, विश्वास उतना ही बनाता है।
ऐसे अवसरों पर जब मनुष्य को गंभीरतम उत्तरदायित्व सौंपा जाता है, तब स्वभावत: आदमी के चरित्र में एक विचित्र-सा निखार आ जाता है।
जब भावना और सौंदर्य के उपासक को बुद्धि और वास्तविकता की ठेस लगती है, तब वह सहसा कटुता और व्यंग्य से उबल उठता है।
बुद्धि और शरीर बस यही दो आदमी के मूल तत्व हैं। हृदय तो दोनों के अंत:संघर्ष की उलझन का नाम है।
मनुष्य का एक स्वभाव होता है। जब वह दूसरे पर दया करता है तो वह चाहता है कि याचक पूरी तरह विनम्र होकर उसे स्वीकार करे। अगर याचक दान लेने में कहीं भी स्वाभिमान दिखाता है तो आदमी अपनी दानवृत्ति और दयाभाव भूलकर नृशंसता से उसके स्वाभिमान को कुचलने में व्यस्त हो जाता है।
अगर आप किसी औरत के हाथ पर हाथ रखते हैं तो स्पर्श की अनुभूति से ही वह जान जाएगी कि आप उससे कोई प्रश्न कर रहे हैं, याचना कर रहे हैं, सांत्वना दे रहे हैं या सांत्वना मांग रहे हैं। क्षमा मांग रहे हैं या क्षमा दे रहे हैं, प्यार का आरंभ कर रहे हैं या समाप्त कर रहे हैं? स्वागत कर रहे हैं या विदा दे रहे हैं? यह पुलक का स्पर्श है या उदासी का चाव और नशे का स्पर्श है या खिन्नता और बेमनी का?
अगर पुरुषों के होंठों में तीखी प्यास न हो, बाहुपाशों में जहर न हो, तो वासना की इस शिथिलता से नारी फौरन समझ जाती है कि संबंधों में दूरी आती जा रही है। संबंधों की घनिष्ठता को नापने का नारी के पास एक ही मापदंड है, चुंबन का तीखापन।



गुनाहों का देवता



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Charitraheen Novel by Sarat Chandra Chattopadhyay Download


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Charitraheen Novel by Sarat Chandra Chattopadhyay Download




  DESCRIPTION OF BOOK

Particulars
(विवरण)
Details (Size, Writer, Lang. Pages
(आकारलेखकभाषा,पृष्ठ की जानकारी)
पुस्तक का नाम (Name of Book) 

चरित्रहीन 

 (Charitraheen Pdf
)
पुस्तक का लेखक (Name of Author) 

शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (Saratchandra Chattopadhyay)

पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी (Hindi) 
पुस्तक का आकार (Size of Book)1.56 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)355
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)
उपन्यास, कहानिया


ABOUT BOOK

 Charitraheen by Sarat Chandra is one of the most famous novels written by the versatile Bengali author almost a hundred years ago.

However, even today, it is as thought-provoking and involving as it would have appeared to the readers of that bygone era, when novelists were quite a few and even those who wrote, seldom touched upon controversial issues of infidelity and social conventions.

‘Charitraheen’ the title literally means ‘Characterless’ and in a very precise manner, sums up the entire storyline. This is a story of immorality, adultery and infidelity, more often performed in thoughts than actions of the protagonists. There is hardly a character in this saga, who could call himself or herself moral. All of them, at one point or other, digress from their accepted path of ideal relationships and step into the bottomless pit of betrayal.

The story begins with the love story of Satish and Savitri. Satish, a staunch Kulin Brahmin, falls for Savitri, who though belongs to a Brahmin family, is a widow, working as a servant in the mess, and is almost untouchable for the Hero in the tight lidded Hindu Society of 1900s. As both of them are too aware of social hierarchy and diktats, they try to conceal their mutual feelings. They hide their love under the garb of humble care and servitude, thus deluding themselves and others.


 द अल्केमिस्ट / The Alchemist ई-बुक (pdf) डाउनलोड करें

 साहित्य का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं है , परंतु एक नया वातावरण देना भी है ।





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Twelfth fail | 12th fail book by Anurag Pathak/ Hindi e book (pdf) download


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ट्वेल्थ फेल | twelfth fail | 12th fail book by Anurag Pathak



  DESCRIPTION OF BOOK

Particulars
(विवरण)
Details (Size, Writer, Lang. Pages
(आकारलेखकभाषा,पृष्ठ की जानकारी)
पुस्तक का नाम (Name of Book) 
ट्वेल्थ फेल | twelfth fail | 12th fail
पुस्तक का लेखक (Name of Author) अनुराग  पाठक  (Anurag Pathak
)
पुस्तक की भाषा (Language of Book)हिंदी (Hindi) 
पुस्तक का आकार (Size of Book)2.3 MB
पुस्तक में कुल पृष्ठ (Total pages in Ebook)177
पुस्तक की श्रेणी (Category of Book)
Novel / Motivation


ABOUT BOOOK

ट्वेल्थ फेल सच्ची कहानी और वास्तविक घटनाओं पर आधारित एक ऐसा उपन्यास है जिसने हिंदी साहित्य जगत में बेस्ट सेलर होने के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. यह कहानी एक साधारण से दिखने वाले लडके के संघर्ष की ऐसी कहानी है जिसमें जीवन को अपनी तरह से गढ़ने के संघर्ष की पराकाष्ठा तो है ही , प्रेम की दीवानगी भी है. इस उपन्यास कस तानाबाना आयएएस की तैयारी करते युवाओं की बेहद दिलचस्प दुनिया है जिसमें असफलता और सफलता के बीच झूलता जीवन है.


.इस कहानी का नायक चम्बल की घाटियों के छोटे से गाँव से निकला …नक़ल करके पास करवाने का ठेका लेने वाले स्कूलों से पढ़ा और एक पुस्तकालय में साफ़ सफाई करने की नौकरी करते हुए देश की सबसे बड़ी परिक्षा पास करके आयएएस की परीक्षा पास करके सबसे बड़ा अधिकारी बनने का सपना देखा. उसने अपने सपने का पीछा करने के लिए छोटे से छोटे काम किये और बड़े से बड़े दुःख झेले . ये ट्वेल्थ फेल की कहानी जितना हंसाती है उतना ही रुलाती भी है. सरल सहज और भावुक कर देने वाले इस उपन्यास को पढ़ना शुरू करेंगें तो आप खुद बी खुद इसमें डूबते चले जायेंगें.


BOOK REVIEW


 अनुराग पाठक द्वारा बारहवीं फेल एक लड़के के बारे में एक हिंदी नॉन-फिक्शन कहानी है जो अपनी कक्षा 12 वीं की परीक्षाओं को दूसरे प्रयास में पास कर लेता है और फिर सिविल सेवा की परीक्षा पास करके भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हो जाता है।


यह सरासर दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी है जो इस बात पर जोर देती है कि यदि आप इसे प्राप्त करने के लिए सिर्फ अपना मन बना लेते हैं तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। मुझे यकीन है कि लेखक ने कहानी को पढ़ने के लिए दिलचस्प बनाने के लिए कुछ रचनात्मक स्वतंत्रता ली है। फिर भी, मुझे अंतिम साक्षात्कार पसंद आया




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Bhagavad Gita: Yatharoop (Hindi) Hardcover – 1 January 2019


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 The Bhagavad-Gita as it is is a translation and commentary of the Bhagat Gita, by a. C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada, founder of the international society for Krishna consciousness, commonly known as the Hare Krishna movement. The Bhagat Gita emphasizes a path of devotion toward the personal God, Krishna. The Bhagat Gita, often referred to as the Gita, is a 700 verse Hindu scripture in Sanskrit that is part of the Hindu epic Mahabharata. This is new edition of Bhagat Gita Hindi by bhaktivedanta Swami Prabhupada.Popularly known as ISKCON Bhagvad Gita. Bhagavad Gita is universally renowned as the jewel of India's spiritual wisdom. Spoken by Lord Sri Krsna, the Supreme personality of Godhead, to his intimate devotee Arjuna, the Gita's seven hundred concise verses provide a definitive guide to the science of self-realization. Indeed, no work even compares in its revelations of man's essential nature, his environment and, ultimately, his relationship with God.